Saturday, 5 November 2016

बागों में बहार है

देशभर में मचा कोहराम है, क्योंकि बागों में बहार है

जबसे होश संभाला तबसे देखा अत्याचार है, क्योंकि बागों में बहार है

भ्रष्टाचारी अफसर - नेता यार है, क्योंकि बागों में बहार है

औरत और दलितों पर हो रहा अत्याचार है, क्योंकि बागों में बहार है

चौराहों पर यहाँ इज्जत लुटना आम है, क्योंकि बागों में बहार है

सत्ता को गाय, गोबर, मंदिर-मस्जिद से इकरार है, क्योंकि बागों में बहार है

कोर्ट - पुलिस अमीरों की खातिरदार है, क्योंकि बागों में बहार है

नोकरशाही को जनता से ना कोई सरोकार है, क्योंकि बागों में बहार है

मीडिया में चाटुकारों की बयार है, क्योंकि बागों में बहार है

भरी दोपहरी में छाया अंधकार है, क्योंकि बागों में बहार है

माल्या, अम्बानी, अडानी आम आदमी के पैसे लूटकर फरार है, क्योंकि बागों में बहार है

भूख, अत्याचार, बेरोजगारी के नजारे आम है, क्योंकि बागों में बहार है

चारों तरफ इंसानियत, भाईचारा, सद्भाव का संहार है, क्योंकि बागों में बहार है

मजदूर - किसान आत्महत्या करने को लाचार है, क्योंकि बागों में बहार है

खेती बाड़ी बर्बादी को तैयार है, क्योंकि बागों में बहार है

गुंडों की सरकारें झंडाबरदार है, क्योंकि बागों में बहार है

लोकतंत्र का गला घोंटने पर आमदा ये सरकार है, क्योंकि बागों में बहार है

पूंजीपतियों की गिरफ्त में हमारा सरदार है, क्योंकि बागों में बहार है

अथॉरिटी को सवालों से होता बुखार है, क्योंकि बागों में बहार है

सत्ता से सवाल करने का ना अधिकार है, क्योंकि बागों में बहार है

देश चल रहा है जैसे कि निर्मल दरबार है, क्योंकि बागों में बहार है

इस देश को व्यवस्था परिवर्तन की दरकार है, क्योंकि बागों में बहार है

आज किसी और का तो आपका नम्बर अगली बार है, क्योंकि बागों में बहार है

Thursday, 3 November 2016

OROP की हकीकत

एक तरफ दिल्ली पुलिस शहीद के परिवार को पीट रही है, गिरफ्तार कर रही है, डेड बॉडी नहीं दे रही और दूसरी तरफ उनकी आवाज उठाने वालों को केंद्र की बीजेपी शासित सरकार और उसके गुर्गे समूह के लोग और मीडिया मिलकर देशद्रोही घोषित कर रही है, आखिर समझा क्या है इस सिस्टम को, हलवा ?

जिस OROP को लेकर भिवानी के सूबेदार ( रि.) रामकिशन ग्रेवाल ने अपने प्राणों की आहुति दी, वो असल में है क्या ? सैनिकों और सरकारी दावों में विरोधाभासों को लेकर इस वन रैंक - वन पेंशन ( OROP ) की हकीकत -

✍ पहली बात तो सरकार ने वन रैंक - वन पेंशन लागु  ही नहीं की, OROP का सीधे शब्दों मतलब होता है एक रैंक से रिटायर होने वाले सभी सैनिकों को एक समान पेंशन मिलना, जो कि किसी भी सरकार ने नहीं किया, मतलब सफ़ेद झूठ बोल रहे है
✍ जूनियर और सीनियर को समान वेतन मिलना, या किसी भी सीनियर को जूनियर से कम वेतन नहीं मिलना
✍ OROP लागु करने की दलील देने वाली सरकार ने 40% वालंटियर रिटायर लेने वाले सैनिकों  को तो वैसे भी बाहर कर रखा है, फिर इसकी जद में सब कैसे आये ?
✍ जो छोटी रैंक के फौजी है उनको आपने वैसे लटकाया हुआ  है । जो थोड़े बहुत लाभार्थी है वो बड़ी रैंक के अफसर है जो आपका मीडिया में आकर बचाव कर रहे है ।
✍ उनमें से आधे तो वो सटके हुए अफसर है जो बोलते है 10 रूपये दे देते तो इन सैनिकों की जुबान बंद हो जाती ( ibn7 का पर पूर्व आर्मी अफसर और बीजेपी प्रवक्ता हुन साहब की आज शाम 5:30 बजे की बहस को देखें )
✍ एक पुराने जनरल वीके सिंह बोलते है कि सैनिकों को 4 पैसे के लिए ऐसे बेवकूफी भरे कदम नहीं उठाने चाहिए, जबकि वो खुद जन्म की तारीख के लिए सुप्रीम कोर्ट तक चले गए थे ।
✍ OROP की रिव्यु कमिटी को आपने बनाया है उसमें सिर्फ एक आदमी को रखा है, अफसोस कि वो भी सरकारी नुमाइंदा है ।
✍ OROP रिव्यु कमिटी 5 साल में रिव्यु देगी, मतलब 5 सालों में रिटायर होने वाले सैनिकों का वेतन अलग अलग होगा जो हर 5 साल बाद एक समान किया जायेगा, इसे प्रतिवर्ष किया जाये, ये सैनिकों की माँग है
✍ बेस ईयर 2015 किया जाये जबकि सरकार 2013 पर अड़ी है,
✍ एरियर का तत्काल भुगतान किया जाये, जनवरी 2006 से आज तक का
✍ एक सैनिक की विधवा की पेंशन बढ़ाई जाये, अभी बमुश्किल 6500 है, जिसमें घर चलाना मुश्किल है
✍ सरकार जितने पैसे को लेकर फंड न होने का बहाना बना रही है, वो मात्र 200 करोड़ सालाना है जबकि उससे कहीं ज्यादा 250 करोड़ तो पिछले साल गैस सिलिंडर की 100 करोड़ की सब्सिडी छुड़ाने  के लिए advertisements पर खर्च कर दिए थे ।
✍ देश में किसी भी सरकारी कार्मिक के ऑन ड्यूटी दिव्यांग होने पर तनख्वाह का 30% मिलता है जबकि वर्तमान सरकार ने इसे सैनिकों के लिए घटाकर 10% कर दिया है ।
✍ देश में पुलिस में DIG 28 साल की सर्विस में बन जाता है, जबकि आर्मी चीफ बनने को 32 साल लगते है पर दोनों के वेतन में बहुत फर्क है ।


इस बात को मानने में कोई झिझक नहीं है कि वेतन में वृद्धि हुई है पर कितनी ? क्या माँग थी उतनी की ? नहीं न, तो फिर वृद्धि - वृद्धि क्यों चिल्ला रहे हो सरकार ?

कुल मिलाकर OROP को आपने मजाक बना दिया है, मेरे घर में 2 रिटायर्ड फौजी है, 2 आने वाले है, और 3 बंदे 6 साल बाद रिटायर आ जायेंगे, सभी की पेंशन में विसंगतिया भरी पड़ी है, आप जितनी बेबाकी से सर्जिकल स्ट्राइक का क्रेडिट खुद को, आरएसएस को दे रहे थे क्या उतनी ही बेबाकी से OROP को ढंग से लागू न करने क्रेडिट भी देंगे ?  अपना फैलियर मानेंगे ?  कभी नहीं, और उम्मीद भी नहीं है क्योंकि शहीदों के ताबूत खा सकते है उनसे उम्मीद करना बेवकूफी होगी । जब ये करने की हिम्मत नहीं है तो चुप हो जाइये और बैठ जाइये, बंद कीजिये ये दिखावा ।
और बात करते है सैनिक सम्मान की

Thursday, 29 September 2016

पप्पू की चाय

पप्पू, चाय लाना

लीजिये साहब चाय

अरे तुम खुद ! पप्पू कहाँ है आज ?

 वो बीमार हो गया साहब, इसलिए गाँव भेज दिया उसे

क्या बीमारी हुई ?

डॉक्टर बोला कोई बड़ी बीमारी है, क्या तो नाम था उसका ? हाँ, मलेरिया, मलेरिया हो गया उसे

तो तुम यहाँ साफ सफाई क्यों नहीं रखते हो, आज उसे हुआ है कल तुम्हें और क्या पता मुझे भी हो जाये

छुआछुत का बीमारी है क्या साहब ?

नहीं रे बिरजू, ये तो गंदगी से फेलती है

साहब, साफ सफाई का मलेरिया से क्या सम्बन्ध ?

तुम्हें इतना भी नहीं पता कि मलेरिया केसे फेलता है ?

नहीं ।

मलेरिया मच्छरों के काटने से फेलता है, जो गंदगी में रहते है । ये जो तुम्हारें यहाँ पड़ोस में कबाड़ी की दुकान में टायरों में पड़े पानी में ही ये मच्छर अंडे देते है और फैलते है ।

ये मलेरिया होता क्या है ?

मलेरिया के परजीवी का वाहक मादा एनोफ़िलेज़(Anopheles) मच्छर है। इसके काटने पर मलेरिया के परजीवी लाल रक्त कोशिकाओं में प्रवेश कर के बहुत तेजी से बढ़ते हैं जिससे रक्तहीनता (एनीमिया) के लक्षण उभरते हैं (चक्कर आना, साँस फूलना, द्रुतनाड़ी इत्यादि)। इसके अलावा अविशिष्ट लक्षण जैसे कि बुखार, सर्दी, उबकाई और जुखाम जैसी अनुभूति भी देखे जाते हैं। गंभीर मामलों में मरीज मूर्च्छा में जा सकता है और मृत्यु भी हो सकती है।

अच्छा, इतना खतरनाक बीमारी है क्या ?

और नहीं तो क्या ? तुम्हें नहीं पता

नहीं

जब तुम्हें होती तब पता होता, दूसरों के दर्द से पता नहीं चलता

मेरे क्यों ?

क्योंकि वो मच्छर तो वहीं के वहीं है न, उस दुकान में

इससे कोई बचने का उपाय नहीं है क्या ?

वो गंदा ठहरा हुआ पानी फिंकवा दो जो वहाँ भरा पड़ा है

लेकिन उससे तो मेरी बोलचाल बंद है आजकल, हमारी लड़ाई हो गयी थी, पिछले महीने की 214 चाय हुई पर वो 200 ही बता रहा था तो हो गयी लड़ाई, कितनी मेहनत से कमाए जाते है पैसे, ये तो हम जानते है न

ठीक है, ठीक है । तुम्हारे ये किस्से अपने पास रखो । मेरा कोई इंटरेस्ट नहीं है इनमें । और सफाई न करवाओगे तो तुम्हारे ही नुकसान है

केसे

कल को तुम्हें हो गयी तो  ? तुम्हारे ग्राहकों के हो गयी तो तुम्हारी तो दुकान बंद हो जाएगी, अगर ये बीमारी बिगड़ गयी तो आदमी इससे मर भी सकता है ।

सच्ची में ! तब तो कल ही सारे गिले शिकवे दूर करता हूँ । और सफाई का भी बोलता हूँ उसे ।

खुद की जान पर आई तो पता चला न, और ये लड़का कौन है ? नया है क्या ?

नहीं साहब मेरा बेटा है चिंटू

तो इसे यहाँ काम पर  क्यों लगा रखा है, पढाओ इसे । अभी उम्र ही क्या है बेचारे की, खेलने- कूदने और पढने लिखने की उम्र है, पढाओ इसे

साहब पूरा 10 साल का है, अभी से धंधे पर लगेगा तो 2 - 4 साल में काम सीख जायेगा । बाद में खुद की दुकान खोलके घर चलाने में हाथ ही बंटायेगा

जेल में जाने का विचार है क्या ?

क्यों ? वो पप्पू बीमार हो गया इसलिये

नहीं, अपने बेटे से काम करवाने की वजह से

बेटा मेरा, काम मेरा फिर इसमें जेल क्यों ?

क्योंकि बाल मजदूरी अपराध है । अगर बाल मजदूरी कराता हुआ कोई पाया गया तो सीधी जेल होगी, वो भी पुरे 1 साल साथ में 10 हजार का जुर्माना भी। क्या समझे ? और कल से स्कूल भेजो पढने के लिये

ठीक है साहब, इसे पढ़ा तो ले पर आजकल स्क़ूलों की फीस इतनी है कि इसे पढ़ाना हमारे बूते से बाहर है

किसने कहा आपको,  सरकार ने 7 साल पहले एक नियम बनाया था कि 6 से 14 साल तक के सभी बच्चों को फ्री शिक्षा दी जाएगी, ये उनका हक है जो कि संविधान के अनुच्छेद 21A में लिखा है कि ये उनका मौलिक अधिकार है । और यदि कोई प्राइवेट स्कूल वाला फ्री में पढ़ाने से मना करे तो उसकी शिकायत शिक्षा विभाग में दर्ज कराओ । किसी भी प्राइवेट स्कूल की टोटल सीट में से 5% सीट RTE के तहत गरीबों के लिए आरक्षित है । क्या समझे ?

यही कि साहब, पढाई ही सब कुछ है । इसके बिना जीवन दुश्वार है ।

Dedicate to #पढ़ेगा_इंडिया_तभी_तो_बढ़ेगा_इंडिया

Wednesday, 21 September 2016

कलेक्टर

फोन बजा तो मैं दौड़कर लपका, देखा हरिराम का फोन है, उठाते ही उधर से आवाज आई, " भाई रामपत, राकेश कलेक्टर बन गया, अभी उसका फोन आया था, बहुत खुश था वो " बोलते बोलते गला रूँध सा गया था उसका, शायद ज्यादा खुशी में अपने जज्बात काबू नहीं रख पा रहा था । मैंने कहा "शाम को आता हूँ, मिलके जश्न मनायेंगे " और फोन काट दिया ।
एकाएक मेरी नजरों में पुराने दिन आ गये । जब राकेश  जन्मा तो उसकी माँ की मौत हो गयी थी । क्योंकि आस पास कोई अस्पताल तो था नहीं, घर में ही दाई को बुलाया गया पर ज्यादा खून बहने से लता भाभी की मौत हो गयी । हरी भाई ने जैसे तैसे करके पाला और पढ़ाया लिखाया । माँ की कमी कभी भी महसूस नहीं होने दी । दिन रात मेहनत करता अपने छोटे से खेत में । एक बरसात वाली फसल होती थी, बाकि समय में मजदूरी करता था । कितनी मेहनत से पढ़ाया था हरिराम ने राकेश को । जब राकेश 12वीं में था और गाँव में बिजली नहीं थी तो हरिराम दिन में दूसरे गाँव जाकर बेटरी चार्ज करके लाता और उसके खाने पीने से लेकर सुबह जल्दी उठाकर चाय बनाता था । जब परिणाम आया तो राकेश ने 12वीं बोर्ड में जिलेभर में प्रथम स्थान प्राप्त किया । फिर स्नातक के लिये शहर की नामी कॉलेज में दाखिला मिल गया था । उसने मेहनत की और यूनिवर्सिटी भी टॉप किया । फिर उसने ias बनने की इच्छा प्रकट की तो हरिराम ने उसे दिल्ली भेज दिया कोचिंग के लिये । कुछ पैसे मैंने दिये और कुछ इसके पास थे, इस तरह कोचिंग की फीस का इंतजाम हो गया । हरिराम घर से कमजोर था पर उसने राकेश की पढ़ाई के आड़े पैसों की तंगी कभी नहीं आने दी । बाकि खुद का खर्चा राकेश वहाँ ट्यूशन देकर निकाल लेता था । इतने में रानी, मेरी बेटी, ने आवाज दी तो सपने से बाहर आया ।

आज सुबह जल्दी उठ गया था, नहा धोकर तैयार हुआ तो रानी की अम्मा ने पूछ लिया " आज नए कपड़े पहन के कहाँ जाने की तैयारी हो रही है ? "
मैंने कहा " शहर जा रहा हूँ । हफ्ते भर पहले जो कलेक्टर का रिजल्ट आया था न, उसमें अपने समाज के कई होनहारों का भी नाम था तो उन्हें सम्मानित करने का कार्यक्रम है । उसमें अपने हरिराम के बेटे राकेश का भी नाम है ।"
" ठीक है जाइये पर समय पर आ जाना वापस, रामपत भैया के वहाँ जाकर हमें भूल ही जाते हो, 2 - 2 दिन तक नहीं आते हो "
" अरे भागवान, उसके साथ रहता हूँ तो सुकून सा मिलता है, और उसे भी । बेटा तो दूर रहता है तो बेचारा अकेला घर में ऊब जाता है । हम बतिया लेते हैं तो उसका भी मन हल्का हो जाता है ।"
" हाँ, हाँ, हम तो आपको परेशान ही करते हैं, सारी शांति तो रामपत भैया के यहीं मिलती है आपको "
" तुम तो नाराज हो गयी, हमारे कहने का मतलब वो नहीं था ..."
" ठीक है, ठीक है, जो भी मतलब था तुम्हारा ... घर में राशन नहीं है लेते आना और जल्दी आना । ये भी याद रखना कि तुम्हारे घर पर भी बीवी बच्चे हैं "

मैंने सोचा थोडा जल्दी ही चलता हूँ, कुछ बड़े लोगों से मिल भी लूँगा, बाद में तो मुझ जैसे छोटे आदमी से मिलने का वक़्त कहाँ होगा । इसलिये तड़के 9 बजे ही पहुँच गया ।  समाज की धर्मशाला में पहुँचा तो देखा काफी चहल - पहल है,  बड़ा शामियाना सजा है, हजारों लोग आये हुये है जिनमें समाज के नेता, समाजसेवी, शिक्षक, उद्योगपति आदि शामिल हैं । मैं भी अपने जानकारों से मिला फिर इतने में हरिराम भी आ गया । उसके लिये आज आगे की सीट बुक थी तो वो मुझे भी आगे ले गया पर व्यवस्थापको ने कहा कि जिनके पास #पास हैं, वही आगे बैठ सकता है तो मैंने कहा " कोई बात नहीं, मैं पीछे बैठ जाऊँगा । राकेश को तो रोज ही देखते है, अपना ही बच्चा है "
रामपत ने भी अपना पास फेंकते हुये कहा " चलो पीछे साथ ही बैठेंगे, पास तो आज है कल नहीं, पर हम तो बरसों के साथी है, चलो "

क्योंकि मैं किसान हूँ

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बंजर को सिंचित बनाता हूँ,
सबको खिलाता हूँ,
पालनहार कहलाता हूँ,
अपना पेट काटकर सबका पेट भरता हूँ,
पर मैं भूखा सोता हूँ,
क्योंकि मैं किसान हूँ
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मैं कचरा - मैला ढोता हूँ,
मैं हरिजन हूँ,
मैं गर्मी में, सर्दी में,
तपता हूँ, ठिठुरता हूँ,
मैं मजदूर हूँ,
क्योंकि मैं किसान हूँ
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जब मण्डी में सेठ लगाता है बोली,
मेरी फसल की ओने पोने दामों में,
मैं टूटे मन से बेच आता हूँ,
फिर जब वही सामान दुकानों पर कंपनियों की पैकिंग में आता है,
तब मैं मोल भाव नहीं कर पाता हूँ,
क्योंकि मैं किसान हूँ
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मैं दिन-रात जागता हूँ,
कड़ी धुप- बरसात में,
खुले आसमां तले रहता हूँ
नई कोंपल फूटने पर इतराता हूँ,
पानी को गिड़गिड़ाता हूँ,
क्योंकि मैं किसान हूँ
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मैं भी बच्चों को पढ़ाना चाहता हूँ,
कुछ नया सिखाना चाहता हूँ,
उन्हें अफसर बनाना चाहता हूँ,
उनकी अच्छी जिंदगी का आशा करता हूँ,
पर स्कूलों की फीस सुनके थरथराता हूँ,
क्योंकि मैं किसान हूँ
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मैं लाला से कर्जा लेकर,
उम्मीदों की फसलें बोता हूँ,
अंत में फसल कटने पर,
फिर जाता हूँ उम्मीदों के खेतों में,
क्योंकि मैं किसान हूँ

क्योंकि मैं किसान हूँ

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जब फसल बर्बाद हो जाती है,
तब लाला बैंकों का कर्ज न चूका पाता हूँ,
बैंक घर भेजती है पुलिस,
जैसे मैं कोई गुनहगार हूँ,
अंत में झूल जाता हूँ सबसे प्रिय पेड़ की किसी डाली पर,
क्योंकि मैं किसान हूँ

मजो ही कुछ और हो - महेश फौजी

पहले आळी हवा रही ना पहले आळ् पाणी
होगी खत्म कहाणी ना मिलति कोई भी चीज पुराणी।                        👌👌�👌�👌�👌�👌�👌�👌�👌

*�मजो ही कुछ और हो*           
          
चिमन बाबाळ घरांकन टुकारियो करबा को '                              
खाती बाबा क गदगाइ करबा को,                   
गंगजी आाळ खेत का मतीरीया खाबा को,                                                                                  हरत बामण आळी पोळी कन तास देखबा                    को,                                  
समंदर बाबोसां को माइक म फोन को हेलो मरबाको,                                                                          
*मजो ही कुछ और है।।*
                       
🏒
मोई डंका अर मारदड़ी खेलबाको,             
लुकखमिचणी म गूंण म लुखबा को           
👳ब्याव म लूखकी टुंटियो देखबा को,      🌧
⛈  नडियो जोहड़ म नागा नहाण को,              
🌠रात म कुवाळ कोठ म नहाण को,           🤕
गणपत बाब को तक की घाबा उठाण को                                         

*मजो ही कुछ और हो।*           

🎰तासयाँ कनू बीड़ी का कूटका उठाबा को                                              
फेर लूकख की बीड़ी पिण को
खेड़ा म जाकि तास खेलण को
स्कूल न जा कि गेल्ल म रहण को
काल्लू आल टिब्ब पर बस क लटकणो को

*मजो ही कुछ ओर हो*

चोमास म जोहड़ी म गुवाळी करण को
चपल भेळी करकि रसड़ी खेलबा को
तगर म खीर बणाकि कांकड़ जिमाण को
🍲🍲आथणा टिब्बा पर गांड घसेड़ी करबा को

*मजो ही कुछ ओर हो*

लामी डस आलो थेलो लेर स्कूल जाण को
रोसावांळ् ख़ात्याळ् खेतम राउण्डबाल खेलण को
गेल्लां म कांटकिलारी मारण को
रामेसरजी गुरजी ऑळ डायलोग सुणबा को
रामबच्चनजी आळ डंडा खाण को

*मजो ही कुछ ओर हो*

होळी म गीनड़ गहालबा को
खेताँ मूं सांगरी अर गुन तोड़न को
भरूंजी का बाकळऑ खाण को
चेजा अर पाया परूँ गुड़ ल्याबा को
जागरण म सारी रात चाय अर बीड़ी पिण को
मंदिर म झालर अर शँख बजाण को

*मजो ही कुछ ओर हो*

मेळ म डोकां की पूंपटी बजांण को
भरूंजी आळ जांट का खोखा खाण को
आती जाती मोटर गाडियाँ क लटकण को
कोटा की चिनी अर किरासणि तेल ल्यांण् को
लोह प्लास्टिक चुग की कुल्फी अर तरबूज ख़ाण को

*मजो ही कुछ ओर हो*

VCR पर फिल्म देखण को
न देखण दियां ट्रान्समिटर परूँ फेस उड़ाण् को
पोळी म चग्घा खेलण को
रामलीला म नकली को सांग देखण को  🤕कुआँळ् बाबोजी कन् चिलम पिण को          

*मजो ही कुछ ओर हो*

बिजळी आळ खम्बा की ताण तोड़ की चकरी गाडी बणाण् को
बिरनियांळी ट्यूबेल मूं चककरीय चोर की ल्याण को
ढ़ाण पर पाणी भरण को
चिंपटळ पर गूदड़ा धोंण को
खेळ मं डांगरां न पाणि पाण को।       🐪🐃🐐🐏🐄

*मजो ही कुछ ओर हो।*

✒✒✒✒✒✒✒✒✒✒✒ महेश फौजी

डॉ कलाम को श्रद्धांजलि

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (Avul Pakir Jainulabdeen Abdul Kalam ) का जन्म 15 October 1931 को तमिलनाडु के Rameswaram में हुआ । इन्होंने 1960 ...